कमसिन उम्र में शादी शादी वाला खेल- 1

(Teen Virgin Fuck Story)

टीन वर्जिन फक स्टोरी में मैंने अपने भाई को उसकी दोस्त के साथ शादी वाला खेल खेलते देखा. मगर वे दोनों कुछ कर नहीं पा रहे थे. तो मैंने उसकी दोस्त की चूत मारने की योजना बनाई.

हाय दोस्तो, ये बात उन दिनों की है जब मैं स्कूल में बारहवीं कक्षा पास कर चुका था और आगे की तैयारी में घर पर टाइम पास कर रहा था.

मेरा छोटा भाई भी पढ़ता था.
उसकी एक सहेली थी, जिसका नाम पल्लवी था.

वह पड़ोस में ही रहती थी और बहुत ही सुंदर प्यारी सी … पर बेहद तेज दिमाग वाली थी.

एक दिन मैंने देखा कि घर के एक कमरे में वह खेल रही है और अन्दर से हंसने की आवाज आ रही है.
मैंने अन्दर जाकर देखा तो दोनों एक दूसरे से शादी शादी वाला खेल रहे थे.

मैं भी अन्दर चला गया तो वे दोनों सकपका से गए.

मैंने कहा- मैं भी खेलूंगा.
मेरा भाई बोला- नहीं, हम शादी शादी वाला खेल दो लोगों में ही खेलते हैं.
मैंने कहा- तुम एक दूसरे से शादी करके किस करते हो, फिर हंसते हो … ये सब मैंने देख लिया है. अब और क्या करते हो!

मेरा छोटा भाई बोला- मैं काम पर चला जाता हूँ और ये खाना बनाती है बस!

मैं हंस दिया और समझ गया कि अभी मेरा छोटा भाई नादान है, लेकिन पल्लवी नीचे सर करके शर्माने लगी.

वह एकदम नई नवेली दुल्हन जैसी लग रही थी.
मेरा मन उसे चोदने का प्लान बनाने लगा. टीन वर्जिन फक का मजा लेना था मुझे.

मैंने कहा- चलो, छत पर चलते हैं, वहां छुपन छुपाई खेलेंगे.
वे दोनों रेडी हो गए.

मैंने छोटे भाई से कहा- भैया, तुम चाली दो, पल्लवी और मैं छुपेंगे … तुम हमें ढूँढना.
वह रेडी हो गया.

मैं पल्लवी को लेकर उसी कमरे में आ गया और मैंने उससे कहा- हम दोनों इस कंबल में छिपेंगे.
वह मान गयी.

मैंने उसे कंबल में सुला लिया और उसके पीछे उससे लिपट कर लेट गया.
मेरा लंड उसकी गांड के उभारों पर टकराने लगा.

उसने कुछ नहीं कहा.
फिर मैंने उसके कान के पास जाकर कहा- पल्लवी, क्या तुम मेरे साथ भी शादी शादी खेलोगी?

वह शर्मा गयी और उसने हां कर दी.
वह जवान हो चुकी थी और उसकी चूत भी शादी का नाम सुनकर गीली हो जाती थी.

मैंने कहा कि आज किस कर दो! फिर कल हम अकेले में असली वाली सुहागरात भी मनाएंगे.
यह सुनकर उसने मेरे गाल पर किस कर दिया.

उसके होंठों से जो गर्म सांसें मुझ पर टकराईं, तो मुझसे रहा नहीं गया.
मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से पूरा लॉक कर दिया.

उसके छोटे छोटे से गीले होंठ कंपकंपाने लगे और उसे एक करंट सा लगा.
उसकी चूचियां एकदम से फूल कर पूरी तन गईं.

मैंने उसके होंठों को नहीं छोड़ा, इतने में मेरा छोटा भाई आ गया और उसने रजाई हटा दी.
वह हमें ऐसे करता देख कर हैरान हो गया.

उसने मासूम होकर पूछा- भैया आप भी शादी शादी वाला खेल रहे हो क्या?

उसे सेक्स के बारे में कुछ पता नहीं था, पर पल्लवी सब जानती थी.
उसने अपनी सहेली से सब सुन रखा था.

मैंने भाई से कहा- आज हम तुझे पूरा शादी शादी खेलना सिखाएंगे.
भाई ने खुश होकर कहा- हां मैं देखूंगा.

पल्लवी बोली- मैं तो एक के साथ ही शादी करूँगी.
मैंने कहा- ठीक है, आज हम दोनों शादी करेंगे, कल से तुम दोनों ही करना.

उसने हां में सिर झुका दिया.

मैंने उसके सिर को उठाया और कहा- आज तुम मेरी पत्नी हो और मेरी सारी बात मानोगी!
यह कह कर मैंने उसके होंठों पर किस कर दिया, वह गर्म होने लगी.

मैंने उसकी छाती के दोनों उभार दबाना शुरू कर दिए.
उसकी सांसें तेज तेज चलने लगीं.

मैंने कहा- चलो अब तुम अपनी चड्डी उतारो!
उसने भाई की ओर देखा, तो मैंने भाई से कहा- तू भी अपनी चड्डी उतार!

उसने झट से उतार दी.
उसकी छोटी सी नुन्नी अभी तनी नहीं थी, बस लटक रही थी.

पल्लवी बड़ी बड़ी आंखों से भाई की छोटी नुन्नी देखने लगी.

तभी मैंने अपनी चड्डी भी उतार दी, तो मेरा सात इंच का मोटा लंबा लंड खड़ा होकर पल्लवी को सलामी देने लगा.
पल्लवी मेरा लंड देख कर डर गयी और बोली- लंड इतना बड़ा भी होता है क्या?

मैंने भाई के लंड को हल्के हाथ से हिलाया, तो उसका भी खड़ा हो गया.
अब पल्लवी दोनों लंड को ऐसे देख रही थी जैसे वह इन्हें खाने वाली हो.

मैंने पल्लवी के कपड़े उतारे और उसके मोटे मोटे नुकीले चूचों को चूसा, उसके मुँह से आह आह की आवाजें निकलने लगी.

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपना लंड उसके मुँह में घुसेड़ दिया.

भाई यह देख कर हैरान हो गया.
उसे भी लंड मुँह में देने की इच्छा होने लगी.

थोड़ी देर में भाई ने कहा कि मुझे भी ये करना है!
मैंने कहा- हां तो आ जा ना!

उसने अपना छोटा लंड पल्लवी के मुँह में डाल दिया.

मैंने पल्लवी की चूत की ओर देखा, क्या कोमल मखमली कुँवारी चुत थी.
मैं उसके दोनों को फैला कर उसकी चूत को चारों तरफ से चाटने लगा.

अब पल्लवी पागल होने लगी और भाई के लंड को जोर जोर से चूसने लगी.
भाई को भी कंपकंपी होने लगी.
उसे समझ नहीं आ रहा था कि लंड में इतना मजा कहां से आ रहा है.

थोड़ी देर में ही भाई की छूट हो गयी.
ये उसकी पहली छूट थी और उसकी नुन्नी से रस धार निकल कर सीधा पल्लवी के मुँह में जा गिरी थी.

पल्लवी उसका सारा सब पी गयी और भाई का लंड मुरझाने लगा और सिकुड़ कर मुँह से बाहर आ गया.
पल्लवी की चूत भी पानी पानी होने लगी, पर उसने खुद को रोक कर रखा.

अब मैंने पल्लवी को 69 पोजीशन में सुलाया और जोर जोर से उसके मुँह में लंड के धक्के देने लगा और खुद उसकी चूत को अन्दर अन्दर तक पीने लगा.
उसकी सांसें तेज होने लगीं और वह जोर जोर से छटपटाती हुई मेरे सिर को अपनी चूत से हटाने की कोशिश करने लगी.

मेरा लंड उसके मुँह में अन्दर बाहर हो रहा था, इससे उसकी केवल सिसकारियां ही गले से निकल रही थीं.
उसने अब अपनी चूत और मेरा लंड छुड़ाने की कोशिश की, पर मैं उसकी चूत से निकलने वाले मधुर रस को पीता ही गया.

लगातार चाटे जाने उसकी चूत एकदम से गर्म होने लगी और उसकी गांड मेरे मुँह की तरफ उठ कर टक्कर मारने लगी.
मैं समझ गया कि अब यह लड़की अपनी रसधार नहीं रोक पाएगी.

ऐसा ही हुआ, वह जोर से मुँह खोल कर आह आह करके मस्ती में आ गई और अपने भाव प्रकट करती हुई रोने लगी.
उसी वक्त एक तेज धार मेरे मुँह में आ गयी, मैंने भी उत्तेजना में आकर उसके खुले मुँह का फायदा उठाया और अपने लंड को पूरा उसके गले तक घुसेड़ कर आह आह करता हुआ अपने लौड़े से कुछ तेज पिचकारियां उसके मुँह में छोड़ दीं.

लंड एकदम गले तक घुसा तो उसे खाँसी आने लगी.
तभी मेरा पानी उसके गले से नीचे उतर गया.
हम दोनों हांफते हुए, थक कर ऐसे ही पड़े रहे.

मेरा लंड सिकुड़ गया और उसकी नाक के छेद में चला गया.
वह लंबी सांसें लेकर उसको सूंघने लगी.

मैं भी अपनी नाक से उसकी चूत सूंघने लगा.
आह क्या सुकून मिल रहा था.

थोड़ी देर में मेरा छोटा भाई उठा और पल्लवी की चूचियों से खेलने लगा.

पल्लवी फिर से गर्म होने लगी.
मैं उठा और बिना दिर किए मैंने पल्लवी को अपने ऊपर लिटा लिया.

उसके दोनों आम पकड़ कर दबा दिए उसकी चीख निकल गयी.

मैंने नीचे से एक दो धक्के भी मारे, मेरा लंड कभी उसकी चूत को छूता कभी नहीं.
उसने भी अपनी जांघों को फैला दिया ताकि मेरा निशाना सही बैठे.

कुछ ही प्रयासों में एक बार मेरा लंड उसकी छोटी सी चुत के छोटे से छेद में घुसता चला गया.

वह चीखी और स्थिर हो गयी. उसकी आंखें एकदम से फटी की फटी रह गईं और उसकी चीख भी एकदम से बंद हो गयी.
एक दो पल तक सन्नाटा छाया रहा, फिर अचानक से वह तेज स्वर में रोने और चिल्लाने लगी.

मैं भी लंड पेलता गया.

कुछ देर बाद वह अपना सुर बदलती हुई बोली- बहुत मजा आ रहा है! आह पेलो आह … और अन्दर तक पेलो … धीरे धीरे पूरा अन्दर कर दो.
मैंने भी अपने लंड को हल्के हल्के से हिला हिला कर अन्दर डाल दिया.

उसकी चूत पहली बार में तो फट गयी थी लेकिन अब उसे भी मजा सा छाने लगा था.
उसने छोटे भाई से कहा- मेरे मुँह को भी चोद दो ना!

भाई ने अपनी लुल्ली उसके मुँह में डाली और वह उम्म करके लालीपॉप की तरह चूसने लगी.
अब नीचे से मैं भी अपनी गांड उठा उठा कर फट फट की आवाजें करता हुआ तेज रफ्तार में ठोकने लगा.

उसके मुँह से ‘पतिदेव पतिदेव बस करो’ की आवाज निकलने लगी.
मेरा दिमाग खिसका तो मैंने अपने दोनों हाथों से उसके पुट्ठे दबा दिए और उनको चौड़ा करके अपनी उंगली एक उसकी गांड में फंसा दी.

उसने गांड उचका कर कहा- नहीं, प्लीज वहां मत करो.
मैंने उंगली निकाल दी, पर उसकी खुशबू मुझे दीवाना बनाने लगी.

मेरा छोटा भाई भी यह देख कर जोश में आ गया और पल्लवी के पीछे से लिपट गया.
उसकी छोटी सी कड़क पतली नुन्नी पल्लवी की गांड पर डांस करने लगी.

भाई ने पल्लवी की गांड पर थोड़ी सुसु कर दी और दौड़ कर बाथरूम में चला गया.

अब मेरी छूट होने वाली थी.
मैंने अपना लंड पल्लवी की चूत से निकाल दिया और उसे घोड़ी बना कर सैट कर दिया.

उसने कहा- बस अब नहीं, प्लीज छोड़ दो!
मैंने उसकी गांड फाड़ने की बहुत कोशिश की, पर वह लगातार खिसक रही थी.

मैंने उसका मुँह दबा दिया और जैसे ही मेरे लंड की टोपी उसकी नाजुक गांड के छेद को फाड़ती हुई अन्दर घुसी, उसने हिम्मत छोड़ दी और मेरा सारा माल उसकी गांड के ऊपर फैल गया.

मैंने उंगली से माल अन्दर डालने की कोशिश की, थोड़ा सा रस अन्दर चला गया.
उस वजह से उसकी गांड चिपचिपी और चिकनी हो गयी, पर माल नीचे गिरने लगा तो मैंने उसकी गांड चाट कर साफ कर दी.

उसे गांड में खुजली होने लगी और मेरी जीभ लगते ही वह मचल गयी.
आह आह करके मजे की सांसें भरने लगी.

मेरा मन उसकी गांड के छेद को खोलने का था.
मगर मेरा लंड अभी सिकुड़ गया था और वह भी काफी थक गयी थी.
वह औंधी होकर लेट गयी.

इतने में मेरा छोटा भाई आ गया.
उसकी सुसु अभी भी खड़ी थी.

मैंने सोचा क्यों न इसकी गांड का छेद भाई की पतली नुन्नी से ही खुलवा लूँ.
मैंने भाई को बुलाया.
वह आ गया.

मैंने पल्लवी को उठा कर डॉगी बना दिया.

पल्लवी बोली- बस करो न!
पर उसकी आंखें अभी पूरी भरी नहीं थीं. वह भी गांड मरवाने के लिए तैयार हो गयी.

मैंने भाई का लंड उसकी गीली गांड के छेद पर सैट किया और पीछे से दबाव दे दिया.
पल्लवी फिर से चीखी और उसकी गांड का ढक्कन खुल गया.

भाई को भी उसकी कोमल गांड का स्वाद पसंद आ गया और पल्लवी भी भाई के नाजुक लुल्ली का मजा लेने लगी.

दोनों को कुत्ते कुतिया के जैसे एक दूसरे पर चढ़ा देख कर मैं पल्लवी के नीचे आ गया और उसकी चूत चाटने लगा.
उसकी चूत से रस बहने लगा.

इतने में भाई हांफने लगा और ‘आह आह …’ बोलता हुआ वह झड़ गया.
मैंने जल्दी से पल्लवी की गांड के छेद को देखा, गांड थोड़ी खुली हुई थी और भाई का गाढ़ा रस बाहर आने वाला था.

मैंने अपने अंगूठे से उसकी गांड के छेद को बंद कर दिया और अब मेरा लौड़ा पहले से भी ज्यादा हैवान बन कर ताव देने लगा.
जैसे ही मैंने अपना अंगूठा हटाया, वैसे ही अपना लंड छेद पर टिका दिया और इस बार मैंने भरपूर ताकत लगा दी.

हम दोनों की चीखें निकल गईं और मैं उसकी गांड फाड़ने में सफल हो गया.
मेरा लंड अब आसानी से अन्दर घुस गया था.

पल्लवी की दोनों जांघें कंपकंपाने लगी थीं. उसके गोल गोल पुट्ठे लाल हो गए थे.
वह नीचे की ओर गिरने लगी.

मैंने उसके संतरा पकड़ कर उसे ऊपर को उठा लिया और पीछे से धक्के देने भी जारी रखे.

पल्लवी ने अब सब कोशिशें छोड़ दीं और मेरा लंड भाई के चिपचिपे पदार्थ में पल्लवी की गांड में चम चम फच् फच् की आवाजें निकालने लगा.
पल्लवी थोड़ी देर में पूरी गिर गयी और मदहोशी में गांड चुदाई के मजे लेने लगी.

मैंने उसकी जांघों को गिरने नहीं दिया, कसकर पकड़े रखा था.
मैं तो अपनी रफ्तार से उसकी गांड को चोदे जा रहा था कि तभी न जाने कहां से मेरे पीछे रानी आ गयी.

रानी वही लड़की है, जिसने पल्लवी को सेक्स का ज्ञान दिया था.
वह बहुत ही चालू, गर्म लड़की है.

वह मेरे पीछे खड़ी थी और अपना मुँह हाथों से ढक रखा था.

वह कुछ कहती कि तभी मेरी लंड में बाढ़ आ गयी और मैंने अपनी ढेर सारी मलाई पल्लवी की गर्म गांड में निकाल दी.

मैं बहुत उत्तेजना में था.
रानी के कुछ कहने से पहले मैंने उसका सिर बालों से पकड़ा और पल्लवी के लाल लाल गर्म हो गई गांड के पुट्ठों में घुसेड़ दिया.

रानी का मुँह उस घाटी में धँसता हुआ पल्लवी की गांड तक जा पहुँचा.
जहां हमारी सुहागरात के प्रेम का ढेर सारा रस बाहर आने को आतुर था.

रानी ने भी वह रस पीने का मौका जाने नहीं दिया. वह मदन रस चाटती चली गयी.
इससे पल्लवी को भी सुकून आने लगा और उसने भी अपनी गांड पीछे दबाना शुरू कर दी.

रानी बिल्कुल भी सांस नहीं ले पा रही थी.
एक तरफ मैंने उसके सिर को पकड़ कर अन्दर दबा डाला था, दूसरी तरफ पल्लवी भी एक एक्सपर्ट रांड के जैसे अपनी गांड से रानी को दबोची हुई थी.

थोड़ी देर में पल्लवी खाली हो गयी और थक कर गिर पड़ी.

मैंने भी रानी के सिर को छोड़ दिया.

रानी ने एक राहत की सांस ली, पर इससे पहले वह हम सभी से कुछ पूछती मैंने पीछे से उसके दोनों उभारों को पूरी तरह मुट्ठी में दबा दिया.

रानी के उभार किसी जवान औरत के जैसे पूरे भरे हुए थे, जैसे किसी पुरुष ने उसके मम्मों को दिन रात दबाया हो.

रानी के बदन में काम की लहर दौड़ने लगी और वह आह करती गयी.
मैंने उसके मम्मों को मसलना शुरू कर दिया.

इतने में पल्लवी ने रानी को देखा.
तो वह हैरान हो गयी … पर वह कुछ नहीं बोली.

मैंने धीमे से रानी के कान में कहा- क्या तुम भी मेरी बीवी बनोगी?
इतने में पल्लवी बोली- राहुल, मुझे इसी रानी ने ही शादी शादी का खेल सिखाया है.

मैंने कहा- पर आज तक इसने कभी यह हमारा आज वाला खेल खेला है?
रानी ने खुद ही कहा- नहीं अभी तक खेला.

तो मैंने उससे पूछा- क्या तुम मेरा साथ खेलोगी?
उसने कहा- जरूर खेलूंगी, पर ये खेल मेरी इच्छा से खेलना होगा.

मैं भी राजी हो गया.
ऐसी गर्म लड़की को कौन नहीं भोगना चाहेगा, चाहे उसकी शर्तों पर ही सही.

दोस्तो, सेक्स कहानी के अगले भाग में मुझे नई चुत का रस मिलने वाला है.
किस तरह से रानी मेरे लौड़े की रानी बनी, पढ़ना न भूलें.
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