मेरे ससुर ने मुझे चोदा-1
जब से मैंने अपने ससुर का हलब्बी लौड़ा देखा था और 3 महीने से मेरे पति गोपाल भी यहाँ नहीं थे तो मेरी चूत में भी आग लगी हुई थी।
ससुर बहू की चुदाई, बेटे की बीवी को नंगी देखना, देख कर मुठ मारना, चोदना
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जब से मैंने अपने ससुर का हलब्बी लौड़ा देखा था और 3 महीने से मेरे पति गोपाल भी यहाँ नहीं थे तो मेरी चूत में भी आग लगी हुई थी।
प्रेषिका : कौसर सम्पादक : जूजाजी मैं फिर करीब 05-30 बजे उठी तो शाम की फिर चिंता होने लगी कि आज ससुर जी को चाय कैसे देने जाऊँ। उनकी बात बार-बार याद आ जाती थी कि शाम को मैं उनके पास नंगी होकर चाय देने जाऊँ। तभी ससुरजी खुद मेरे रूम में आ गए। बोले- […]
प्रेषिका : कौसर सम्पादक : जूजाजी मैंने कहा- बाबूजी प्लीज़… मुझे पता है आप क्या करना चाहते हैं… प्लीज़ ऐसा मत करिए… यह बहुत लंबा है….बाबूजी प्लीज़… ऐसा मत करना..! और मैं चीखने लगी। ससुर जी ने कहा- बहू, तुझे मुझ पर भरोसा होना चाहिए… ऐसा कुछ नहीं होगा और ये सब मैं तुझे मज़े […]
प्रेषिका : कौसर सम्पादक : जूजाजी उनके झटके बढ़ते गए और एकदम से उन्होंने पानी की धार मेरी चूत में छोड़ दी और वो मुझसे चिपक गए। मैं भी अपने आप को रोक ना सकी और मैंने भी पानी छोड़ दिया, मैं भी उनसे चिपक गई, उनका लण्ड अब भी मेरे अन्दर ही था। हम […]
प्रेषिका : कौसर सम्पादक : जूजाजी मैं नहा-धो कर जल्दी से रसोई में गई और उनका नाश्ता और दोपहर का खाना जल्दी से तैयार किया। मुझे उनकी तिलावत करने की आवाज़ आ रही थी। मैंने मन में कहा कि कैसा ढोंगी इंसान है, यह तो अल्लाह से भी नहीं डर रहा। फिर थोड़ी देर में […]
प्रेषिका : कौसर सम्पादक : जूजाजी मुझे नहीं पता फिर क्या हुआ, उसके बाद जब मेरी आँख खुली तो मेरे ऊपर एक चादर पड़ी थी और मैं अभी भी ससुर जी के बिस्तर पर ही थी। घड़ी में देखा तो करीब 2 बज रहे थे। मैं उठी तो मेरा पूरा जिस्म दर्द कर रहा था। […]
प्रेषिका : कौसर सम्पादक : जूजाजी मेरा नाम कौसर है। यह मेरी सच्ची कहानी है। हम शिकारपुर में रहते हैं। हम 3 बहनें हैं, मैं सबसे बड़ी हूँ। मेरे अब्बू काफ़ी साल पहले गुजर गए थे, तब से माँ ने ही हमारा ख्याल रखा है। मैंने ग्रेजुएशन 2010 में की थी। मेरा रंग एकदम साफ़ […]
सुनीता और अजय दोनों भाई-बहन अपनी दीदी अनीता के यहाँ आ गये थे। अनीता ने भाई बहन की खूब खातिरदारी की। सुनीता ने पूछा- दीदी, कहीं मौसा जी दिखाई नहीं पड़ रहे हैं? अनीता ने मुस्कुराते हुए पूछा- क्या बात है सुनीता, मौसा जी को देखे बिना चैन नहीं पड़ रहा? ठीक है, अभी दुकान […]
रानी मधुबाला रात के करीब दो बजे सुनीता का हाथ रामलाल के लिंग को टटोलने लगा। वह उसके लिंग को धीरे-धीरे पुन: सहलाने लगी। बल्ब की तेज रोशनी में उसने सोते हुए रामलाल के लिंग को गौर से देखा और फिर उसे अपनी उँगलियों में कस कर सहलाना शुरू कर दिया था। रामलाल और अनीता […]
रात हुई, दोनों बहनें अलग-अलग बिस्तरों पर लेटी। सुनीता आँखें बंद करके सोई हुई होने का नाटक करने लगी। रात के करीब दस बजे धीरे से दरवाजा खुलने की आवाज आई। सुनीता चौकन्नी हो गई, उसने कम्बल से एक आँख निकाल कर देखा कि दीदी के ससुर अन्दर आये। अन्दर आकर उन्होंने अन्दर से कुण्डी […]
रानी मधुबाला ‘दीदी, बताओ प्लीज, फिर पति क्या करता है पत्नी के साथ?’ ‘उसे पूरी तरह से नंगी कर देता है और फिर खुद भी नंगा हो जाता है। दोनों काफी देर तक एक दूसरे के अंगों को छूते हैं, उन्हें सहलाते हैं और अंत में पति अपनी पत्नी की योनि में अपना लिंग डालने […]
अनीता अपने ससुर की पक्की चेली बन गई। अब वह ससुर के खाने-पीने का भी काफी ध्यान रखती थी ताकि उसका फौलादी डंडा पहले की तरह ही मजबूत बना रहे, पति की नपुंसकता की अब उसे जरा भी फ़िक्र न थी। रामलाल सबके सामने अनीता को बहू या बेटी कहकर पुकारता परन्तु एकांत में उसे […]
रामलाल जब लिंग धोकर बाथरूम से लौटा तो उसके गोरे, मोटे और चिकने लिंग को देख कर अनीता की योनि लार चुआने लगी। योनि रामलाल के लिंग को गपकने के लिए बुरी तरह फड़फड़ाने लगी और अनिता ने लपक कर उसका मोटा तन-तनाया लिंग अपने मुँह में भर लिया और उतावली हो कर चूसने लगी। […]
बहू के नितम्बों को सहलाने के बाद तो उसका भी तनकर खड़ा हो गया था, इधर अनीता के अन्दर का सैलाब भी उमड़ने लगा, उसके तन-बदन में वासना की हजारों चींटियाँ काटने लगी थीं। रामलाल का तना हुआ लिंग अनीता की जाँघों से रगड़ खा रहा था जिससे अनीता को बड़ा सुखद अनुभव हो रहा […]
अनीता की शादी अनमोल से हुई और सुहागरात को अनमोल की मुँहबोली भाभी उन दोनों को एक साथ कमरे में करके अनीता को बता गई कि अनमोल शर्मीला तो संभोग की पहल अनीता को ही करनी होगी… हुआ भी यही… अनीता ने अनमोल को संभोग के लिए तैयार किया और उसके बाद लगभग आधे घंटे […]
पापा जी शायद सेक्स के माहिर खिलाड़ी थे क्योंकि अब वो मेरे दोनों उत्तेजनादायक जगहों पर यानि की स्तन और चूत को एक साथ रगड़ रहे थे, बीच बीच में मेरी बाहों के नीचे कांख वाले हिस्से पर भी जीभ फिरा रहे थे।
पापा जी ने मुझे पीछे से आकर पकड़ लिया, मैं चिल्लाई और उनसे छूट कर भागी और इस भागदौड़ में मेरा तौलिया भी गिर गया, अब मैं सिर्फ पैंटी और ब्रा में ही रह गई थी।
मेरे चूतड़ ऊपर की तरफ थे, मेरी चूत में से नीलेश के लौड़े का पानी मेरी जांघों से निकल कर बिस्तर पर दाग बना रहा था, मेरे कमरे का दरवाज़ा भी खुला हुआ था और ससुर पहले अपने कमरे में गए और फिर मेरे कमरे में आ गये।
मेरा नाम स्वाति है, 28 साल की शादीशुदा हूँ, मेरा कद 5'7" है, मेरे उरोज बहुत कसावट लिए हुए 34 इन्च के हैं, मेरी कूल्हे या सेक्सी भाषा में कहें तो मेरी गाण्ड उभरी हुई गोल और 37 इन्च की पर बहुत ही आकर्षक और सेक्सी है, जांघें मस्त भरी भरी और मांसल, पिंडलियाँ सुडौल...
कहानी का पिछला भाग: कड़क मर्द देखते ही चूत मचलने लगती है-1 मौसा जी लॉबी से गिलास उठा लाए। उसमें शराब थी। बोले- पी लो थोड़ी सी.. तुझे भी मस्त नींद आएगी। “नहीं.. मौसा जी, मैंने कभी नहीं पी..” “आज पी लो.. देखो मैंने तुम दोनों को दावत पर बुलाया है। पहली बार आई हो.. […]