निम्फोमेनिया : सेक्स की लत- 2

(Daily Sex Story)

सनी वर्मा 2025-03-31 Comments

डेली सेक्स स्टोरी में शादी के बाद जब दुल्हन ने चुदाई का मजा चख लिया तो उसे चुदाई बहुत अच्छी लगी. अब उसे हर रोज अपनी चूत में लंड चाहिए था.

कहानी के पहले भाग
शादी के बाद लगा चुदाई का शौक
में आपने पढ़ा कि संजीव की शादी कुंवारी सिमरन से हुई. दोनों को सेक्स का शौक था.
सिमरन को अपनी सहेलियों, भाभियों के साथ सेक्सी बातें करने में मजा आता था.
उसकी सहेलियां, भाभियाँ भी बिगड़ी हुई थी, उनकी बातों में घूम फिर कर सेक्स आ ही जाता.

अब आगे डेली सेक्स स्टोरी:

शाम होते ही सिम्मी डिनर की तैयारी कर लेती.
उसे मालूम था कि संजीव के आने के बाद तो कुछ होने वाला नहीं है.

संजीव लगभग 8 के बाद ही आ पाता.
जिस दिन थोड़ा जल्दी आ जाता, वो रास्ते से कुछ नॉनवेज या पकोड़ी लेता हुआ आता.
सिम्मी समझ जाती कि आज ड्रिंक्स का मूड है.

संजीव आते ही सिम्मी को गोदी में उठाकर ताबड़ तोड़ चूमा चाटी करता हुआ बाथरूम में घुस जाता.

बंगलौर का मौसम बढ़िया रहता है तो वीकेंड में ही एक दो दिन वो लोग बाथटब में ही लेते लेते ड्रिंक्स लेते.

संजीव को सिम्मी के मम्मे बहुत पसंद थे. वो उन पर खूब सारा जेल लगाकर टब में खूब झाग बना लेता फिर सिम्मी को चिपटा कर लेटता.
उसके हाथ तो हमेशा सिम्मी की गोलाइयों को मसलते रहते.

उधर सिम्मी भी कम नहीं थी. उसके हाथ में संजीव का लंड आ जाये तो फिर छोड़ती नहीं थी.

वो संजीव को टब में खड़ा करके उसके लंड पर व्हिस्की डालती और फिर लंड को चाटती.
संजीव भी उसके मम्मों को शराब से नहला कर चूमता.

बाथटब में घोड़ी बनाकर संजीव उसकी चुदाई न करे ऐसा हो ही नहीं सकता था.
सिम्मी को भी चैन नहीं पड़ता था बिना टब में चुदे.
हालाँकि वो कोशिश करती थी कि वो संजीव के लंड के ऊपर बैठ जाये और ऊपर से शावर की फुहार पड़े.

कुल मिलाकर एक घंटा टब में बिताकर दोनों बाहर आते.

संजीव तो लुंगी पहन लेता और सिम्मी के हिस्से में लुंगी के साथ टी शोर्ट या केवल टी शर्ट ही आती जिसमें उसके आग पीछे दोनों छेद दिखते रहते.

खाना खाकर दोनों टेरिस पर खड़े होकर एक दूसरे की बाँहों में समाये हुए सिगरेट के लच्छे उड़ाते.
फिर आता धमाल टाइम.

सिम्मी इतनी चुदासी हो गयी थी कि वो डिनर के बाद एक मिनट भी किचन में नहीं रहना चाहती थी.
बस बर्तन सिंक में डाले और संजीव की बाँहों में.

सिम्मी टेरिस पर भी ज्यादा समय बर्बाद नहीं करती और लुंगी में हाथ डालकर संजीव का लंड मसलती रहती.
आखिर संजीव भी उसे उठाकर बेड पर जा पटकता.
संजीव भी ठरकी था, वो अक्सर पोर्न मूवी लगा देता टीवी पर. फिर दोनों उसकी नक़ल करते हुए सेक्स करते.

सिम्मी तो लेटते-लेटते अपने कपड़े उतार देती और टांगें चौड़ाकर संजीव को उँगलियों से इशारा करके बुलाती.
संजीव भी लुंगी फेंक कर सीधे सिम्मी की चिकनी टांगों के बीच गुलाबी मखमली चूत में अपनी जीभ घुसा देता.

सिम्मी आहें भरती और अपने हाथ से चूत का छेद और चौड़ा देती.
संजीव पूरी जीभ घुसाते हुए एक हाथ से उसके मम्मे मसलता.

संजीव को पीछे से सिम्मी की गांड मारने की तारक दिमाग में हमेशा रहती तो वो ढेर सारा थूक सिम्मी की चूत में लगा कर एक उंगली भी अंदर घुसा देता.

अब जब सिम्मी आहें भरते हुए कसमसाने लगती तब संजीव बहते थूक से लपेट कर अंगूठा सिम्मी की गांड की दरार में घुसाने की कोशिश करता.

बस इतने में ही सिम्मी होश में आ जाती और वो प्यारी प्यारी गालियाँ देते हुए संजीव को दबा लेती और उसका लंड मुंह में ले लेती.
सिम्मी लंड चूसते समय अपने होठों और जीभ से इतना दबाब बनाती की संजीव को अपने को छुड़ाना मजबूरी हो जाता.

फिर संजीव उसकी टांगें चौड़ाकर ऊपर करके अपना मूसल पेल देता सिम्मी की चूत में.

हालाँकि सिम्मी भी मजबूत काठी की थी पर जब लंड चूत में हो तो चूत सरेंडर हो ही जाती है.
सिम्मी भी उछल उछल कर संजीव के लंड से ताल मिलाती.

संजीव कितनी भी पेलम पाल कर ले पर सिम्मी को थकाना उसके बस की बात नहीं थी.

अब सिम्मी उसे नीचे लिटाकर चढ़ जाती, उसके ऊपर और अपने हाथ से उसका लंड अपनी चूत में करके लगती उछलने.

संजीव उसके मटकते हुए मम्मों को लपकता तो सिम्मी नीचे झुक जाती और संजीव के सर को सहारा देकर ऊपर उठाती ताकि संजीव उसके मम्मे चूस सके.
सिम्मी को चुदते समय मम्मे चुस्वाने में बड़ा मजा आता था.

संजीव का तो हो जाता पर सिम्मी की प्यास अधूरी रह जाती.
अभी नया नया शौक था चुदाई का. सिम्मी इससे ही संतुष्ट हो, संजीव से लिपट कर सो जाती.
इसीलिए रात की कसर वो सुबह उठते ही निकलती.

अब दिन में भी सिम्मी पोर्न देखने लगी.
उसकी उंगली अब पोर्न देखते समय चूत की खुजली मिटाती.

सिम्मी अपनी चूत को ये समझा लेती कि उसका लंड आने वाला ही होगा.
फिर रात को वो अपनी चूत की खुजली संजीव से मिटवाकर ही रहती.

संजीव भी अब पोर्न देखते समय उसे नए लंड का जिक्र करके खूब उकसाता.
सिम्मी की चूत तो और लंड मांगती … पर कोई ऐसा माहोल नहीं था.

संजीव को भी अच्छा लगता जब सिम्मी सेक्स के लिए तड़पती.
वो पोर्न देखते समय सिम्मी को खूब उकसाता कि नए लंड का स्वाद ही कुछ और होता है.

संजीव के मन में ये आ गया था कि बीवी को जितना सेक्स की बातें करके भड़काओगे, वो बेड पर उतना ही मजा देगी.
लब्बे लुबाव ये कि संजीव ने दिन रात पोर्न दिखाकर और हर समय नए लंड का जिक्र करके सिम्मी के मन में चुदाई की आग और भड़का दी.
अब वो भी नए लंड का ख्वाब देखने लगी.

उसने जब एक बार अपनी हमराज भाभी की कसम और जोर देकर पूछा तो उन्होंने हांक लिया कि हाँ वो भी अपने पति के एक दोस्त से चुदती हैं.
पर उन्होंने सिम्मी को ये साफ़ बताया कि पति कितना भी उकसाए, पर वो कभी नहीं बर्दाश्त कर सकता कि उसकी बीवी किसी और से चुदे. इसलिए कभी ऐसा मौक़ा मिले तो पति को खबर नहीं लगनी चाहिए. हाँ, अपनी जान बचाने के लिए पति को एक बार कोई नयी चूत दिलवा दो तो वो हमेशा उस अपराध बोध से दबा रहेगा.

सिम्मी की तो चूत में खुजलाहट बढ़ती ही जा रही थी.
वो अब उंगली, खीरे, केले सब का इस्तेमाल करने लगी.

उसकी सोच इतनी गन्दी होती जा रही थी कि फल सब्जी खरीदते समय उसे ये ख्याल रहता कि कौन सा खीरा या केला उसे ज्यादा मज़ा देगा.
वो हर मर्द का उभार देखने की कोशिश करती.

कभी कभी संजीव ज्यादा थका होता तो भी सिम्मी उसे नहीं बक्शती, जबरदस्ती चूस चूसकर उसको अपने ऊपर चढ़ा ही लेती.

शादी का एक साल बीतते बीतते संजीव तो सेक्स से थकने लगा, खासतौर पर वीक डेज में … पर सिम्मी की चुदास बढ़ती ही जा रही थी. सिम्मी की उसी भाभी ने वाईब्रेटर का जिक्र कर दिया तो सिम्मी ने संजीव से पीछे पड़कर ऑनलाइन मंगवा ही लिया.

संजीव को भी वाईब्रेटर से मजा आने लगा.
सिम्मी जब अपनी चूत में वाईब्रेटर करके मचलती या कसमसाती तो संजीव उसे और उकसाता.
वो कहता- देख अब नया लंड तेरे को चोद रहा है.
सिम्मी संजीव को अपने मम्मे देती कि तुम इन्हें चूसो, नीचे उसे चोदने दो.

संजीव अपने लंड के साथ वाईब्रेटर को भी घुसा लेता.

संजीव ने सिम्मी से अब गांड मारने की बात करी तो सिम्मी तैयार हो गयी.

शुरू के दो चार बार तो सिम्मी को दर्द हुआ पर चुदास की आग ने उसे वो दर्द भी भुला दिया.

अब सिम्मी आगे पीछे दोनों तरफ से चुदने लगी.
कभी कभी संजीव चुदाई जल्दी निबटा कर थकान का बहाना बना कर सो जाता तो सिम्मी दबे पाँव बाथरूम में जाती और वाईब्रेटर से अपनी चूत की खुजली मिटाती.

सिम्मी इस कदर लंड की भूखी हो गयी कि बाज़ार में आते जाते भी वो मर्दों के उभार देखती.

वो तो गनीमत थी कि संजीव वीकेंड सिर्फ सिम्मी के लिए रखता.
पहले तो संजीव प्लानिंग करता था कि वीकेंड पर चुदाई कैसे होनी है.
अब वो काम सिम्मी करती.
पूरे हफ्ते पोर्न देख देख कर और सहेलियों से बातें कर करके सिम्मी अपना वीकेंड चुदाई प्लान तैयार कर चुकी होती.

सिम्मी इसके लिए अपने जिस्म पर भी मेहनत करती.
शुक्रवार को वो पार्लर जरूर जाती. घर पर भी अपने प्राइवेट पार्ट्स को चिकना करती.

डेली सेक्स का मजा लेने के लिए वह दिन में भरपूर नींद लेती ताकि रात को नींद न आये.

पर संजीव क्या करे बेचारा … तो शुक्रवार को तो संजीव कल करेंगे कहकर जान बचा लेता.
पर शनिवार की सुबह से सोमवार की सुबह तक सिम्मी उसका कीमा बना देती.

संजीव को भी आश्चर्य होता कि इस सीधी साधी लड़की को क्या हो गया.
फिर वो सिम्मी की कामाग्नि के लिए अपने को ही जिम्मेदार मानने लगा कि मैंने ही तो हर समय सेक्स सेक्स की रट लगाई तो अब उसकी आग भड़क चुकी है.

पर संजीव भी चुदक्कड़ पूरा था.
वीकेंड पर वो भी पूरे पैंतरे अपनाता.

दो मांसल जिस्म जब गुत्थम गुत्था होते तो बेड की तो शामत ही आ जाती.

संजीव ने एक गलती और कर दी.
हर रात पोर्न में थ्रीसम सेक्स देखते दिखाते उसने सिम्मी के मुंह से यह कहलवा ही लिया कि वो थ्रीसम के लिए तैयार है.
पर सिम्मी अपनी भाभी की वो बात नहीं भूली थी कि पति चाहे जितना उकसाए कभी उसकी जानकारी में नए लंड से चुदना नहीं है.

इसका ट्रायल तो उन दोनों ने गोवा में अपने कोटेज में मसाज करा कर कर ही लिया.
सिम्मी की सहमति से संजीव ने एक मसाज बॉय अपने दोनों की मसाज के लिए कोटेज में ही बुला लिया.

जब वो सिम्मी की मसाज कर रहा था तो संजीव सिम्मी के कान में खुसर पुसर करके उसे उकसाता रहा.
अब सिम्मी इतनी गर्म हो गयी कि जब मसाजर ने उससे पेंटी और ब्रा थोड़ी ऊपर नीचे सरकाने को कहा तो संजीव ने सिम्मी की ब्रा का हुक पीछे से खोल दिया.
सिम्मी कुछ भी नहीं बोली.

फिर संजीव के इशारे पर मसाज बॉय ने सिम्मी की पेंटी नीचे कर दी.

सिम्मी कसमसाई जरूर पर उसने रोका नहीं.
बस यहीं संजीव की गांड फट गयी की कहीं सिम्मी उस मसाज बॉय का लंड न पकड़ ले.

संजीव ने आँख के इशारे से मसाज बॉय को मसाज बंद करने को कहा.

उसके जाते ही सिम्मी चढ़ गयी संजीव के ऊपर और उसकी जबरदस्त चुदाई करते समय लड़ पड़ी कि मूड तुमने ही तो बनाया था, फिर क्यों भगा दिया उसे.
खैर बात आई गयी हो गयी.

पर संजीव को लगा कि आगे भी का भी मौक़ा मिलेगा तो सिम्मी थ्रीसम से हुज्र नहीं करेगी.
पर सिम्मी बहुत चालाक और चौकन्नी हो गयी थी.

गोवा से लौटकर एक रात सेक्स के दौरान जब संजीव ने नए लंड का अलाप गाया तो सिम्मी ने उसे चूमते हुए उसे कसम दी कि ये बात बेड तक ही ठीक है, असल जिन्दगी में वो संजीव के अलावा किसी और से सेक्स सोच भी नहीं सकती. हाँ, हंसी मजाक और छेड़ा छाड़ी सब चलता है.

संजीव ने दिखाया तो ये कि सिम्मी उसकी बात क्यों नहीं मान रही, पर उसे मन में बड़ी तसल्ली मिली की सिम्मी कितनी भी चुदासी सही, पर खूंटा कभी नहीं छोड़ेगी.
ये तो मर्द की फितरत है की अपने लिए सब जायज़ और बीवी के लिए सारी बंदिशें.

अपनी चुदास से सिम्मी भी चकित थी.
जैसा की आजकल लड़कियों की आदत होती है हर बात गूगल पर सर्च करती हैं.
सिम्मी ने देखा तो उसे लगा कि कहीं वो निम्फोमैनिक तो नहीं हो गयी है.

अब संजीव से कहने की तो उसकी हिम्मत नहीं थी.

उसने अपनी उसी हमराज भाभी से पूछा.
तो उन्होंने हँसते हुए जवाब दिया कि अगर शादी के शुरूआती सालों में चुदाई नहीं करोगी तो क्या बच्चे होने के बाद करोगी.
उन्होंने तो उसकी आग को और भड़का दिया कि अगर संजीव साथ न दे रहा हो तो एक दो दोस्त बना लो.

उन्होंने उससे कहा- हम को देख ले कि हम कितनी खुश और संतुष्ट हैं अपनी सेक्स लाइफ से क्योंकि हमारे शारीरिक सम्बन्ध भी अपने पति के दोस्त से हैं.
उनका कहना था कि सभी पति चाहते हैं कि उनकी पत्नी उनके सामने दूसरे से चुदे. पर इसमें ख़तरा है. इसलिए चुदो जरूर … पर पति को खबर नहीं हो.

इस पर सिम्मी ने उनसे पूछा- क्या भैय्या भी आपके दोस्त की बीवी को चोदते हैं?
तो वो भाभी बड़ी बेफिक्री से बोली- उसकी बीवी को नहीं चोदते होंगे तो किसी और की बीवी को चोदते होंगे. मैं टेंशन नहीं करती. मुझे तो अपनी चुदाई से मतलब है बस!

अब तो सिम्मी का दिमाग ही घूम गया.
उसकी सेक्स एक्सप्रेस फिर फुल स्पीड पर चल पड़ी.

अब वो पोर्न देखकर समय संजीव को उकसाती कि संजीव क्यों नहीं किसी दूसरे की बीवी को चोदता.
संजीव हंसकर कह देता कि किसी की बीवी तेरी तरह गर्म नहीं है.

डेली सेक्स स्टोरी कई भागों में चलेगी.
आप हर एक भाग पर अपने विचार भेजते रहें.
[email protected]

डेली सेक्स स्टोरी का अगला भाग: निम्फोमेनिया : सेक्स की लत- 3

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