अध्यापक ने विद्यार्थी की गांड फाड़ दी- 2

(Xxx Teacher Story)

मोनी पोली 2025-04-03 Comments

Xxx टीचर स्टोरी में सुपरवाइजर ने एग्जाम में मेरी मदद करने के बदले मेरी गांड मांग ली. मुझे भी गांड मरवाना अच्छा लगता है पर मैं जानबूझ कर थोड़े नखरे करने लगा.

दोस्तो, मैं आपका मोनी एक बार पुनः अपनी गांड चुदाई की कहानी में स्वागत करता हूँ.
कहानी के पहले भाग
टीचर ने मदद के बदले गांड मांगी
में अब तक आपने पढ़ा था कि सर मेरी गांड मारने की फिराक में थे, यह उनकी आंखों में छाई हुई वासना से साफ समझ आ रहा था.

अब आगे Xxx टीचर स्टोरी:

थोड़ी देर के बाद सर ने मुझे खुद से अलग किया और एक चेयर पर बैठ कर मुझे अपने सामने खड़ा किया.
उन्होंने मेरी पैंट खोलनी शुरू की, तो अनायास ही मेरा हाथ मेरी पैंट के हुक पर चला गया.

‘सर …!’ मेरे मुँह से मधुर सरगोशी आई क्योंकि मुझे शर्म भी आ रही थी.
मेरे हाथ ने उनको रोकने की नर्म सी कोशिश की लेकिन सर ने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और मेरी पैंट को खोल कर मुझे घुमा दिया.

मैं चुपचाप खड़ा सर को सब कुछ करने दे रहा था.
सर ने मेरी पैंट को खींच कर नीचे की तरफ सरका दिया और मेरी पैंट मेरे पैरों पर जाकर गिर पड़ी.

तभी सर ने मेरे भारी चूतड़ों को देखा और सेक्सी आवाज में कहा- हाय … क्या मस्त बड़ी गांड है.
वे चड्डी के ऊपर से ही मेरे गांड पर अपना हाथ फेरते हुए मजा लेने लगे.

तभी सर ने मुझे आगे झुकने को कहा.
मैं वह सब करता गया जो वे कहते गए.

मैं अपने गोरे घुटनों पर अपने गोरे हाथ रख कर आगे की ओर झुक गया.

तभी सर ने धीरे से मेरी अंडरवियर को भी नीचे की तरफ खींच दिया और वह भी मेरी टांगों पर जा गिरा.

अब सर ने रुक कर मेरी कसी कंदली गोरी गोरी जांघों को देखा और मेरी मोटी कसी गोरी मुलायम गांड को निहारा.

‘उफ … क्या मस्त जवानी है … क्या खूबसूरत गांड है तेरी!’
सर ने मीठी आह भरते हुए कहा.

तभी उनकी नजर मेरी कसी गांड के बीच मेरी गांड के छोटे से छेद पर जा पड़ी और उनकी आंखों में चमक आ गई.

उन्होंने झट से मेरे दोनों चूतड़ों को थाम लिया और अपने होंठ मेरी गांड के गुलाबी छेद पर रख दिए.

मेरे मुँह से सिसकारी फूटी ‘उफ … सिईईईई … सर … क्या कर रहे हो!’

सर मस्ती से मेरे छेद को चाटने लगे.

मेरा छेद लुपलुप होने लगा तो उन्होंने अपने अनुभव से मेरे छेद को फैला दिया और उसके अन्दर अपनी पूरी जुबान को डाल दिया.

मैं सिहर गया और मस्ती से अपनी गांड को उनकी जीभ का सुख दिलाने लगा.
वे भी उन्मत्त सांड की तरह मेरी गांड के छेद का स्वाद लेने लगे.

मैं मस्ती में खो गया और मेरी आंखें बंद होने लगीं.

मेरे अपने दांत मेरे होंठों को दबाने लगे.

‘उम्ह्ह्ह … आह्ह्ह्ह … सीईई …’
मेरी मादक सिसकारियां आने लगीं.

काफी देर तक सर ने मेरे गुलाबी छेद को चाटा और मेरे चूतड़ों पर हर तरफ अपनी खुरदुरी जुबान को फेरने लगे.
सर के थूक से मेरी पूरी गांड गीली हो गई और मेरी गांड का छेद भी मुझे अपने छेद पर एक मीठी सी ठंडक का अहसास होने लगा.

फिर सर ने मुझे खड़ा किया और मेरी पैंट और अंडरवियर को एक साथ मेरी टांगों से निकाल फेंका.

पैंट और अंडरवियर के निकलते ही मैं पूरा नंगा हो गया.
सर एकटक मेरे गोरे जिस्म को घूरने लगे.

मेरी गोरी जांघें, रस भरे बड़े बड़े पौंद, गुलाबी रंगत वाली उभरती चूचियां सर को तो जैसे सांस लेना मुश्किल हो रहा था.

सर के इस तरह देखने से मुझे भी शर्म आने लगी.

तभी सर ने मुझे खुद से लिपटा लिया और पागलों की तरह यहां-वहां किस करने लगे.

कुछ ही देर में वे मेरे पूरे बदन पर हाथ फेरने लगे थे.
उन्होंने मेरी जांघों को मसला और मेरी गांड को कस कस कर भींचने लगे.
मेरी चूचियों को उंगलियों से मसल दिया.

फिर सर ने मुझे अपने निपल्स को चूसने को कहा.
मैंने झिझकते हुए अपने होंठ सर के निपल्स पर रखे और उनको चूसने लगा.

सर मस्ती में सिसकारियां लेने लगे.
सर के काले निपल्स मेरे गुलाबी होंठों के बीच थे और मैं उनको चूसे जा रहा था.

कुछ देर बाद सर ने मुझसे अलग होकर मुझे देखा और अपने गमछे को उतार फेंका.
अब सर मेरे सामने पूरे नंगे खड़े थे.

तभी सर के लंड को देख कर मेरी सांस अटकने लगी.
सर का लंड एक काले सांड का लंड लग रहा था. बहुत मोटा और लंबा … और उसके नीचे लटकते टट्टे!

ऊई मां … इतने बड़े टट्टे मैंने किसी के नहीं देखे थे.
बहुत ही बड़े बड़े और मोटे लटकते टट्टे थे … वे दोनों लंड के पहरेदार से लग रहे थे.
वाकयी सर के टट्टे बहुत ही काले और बड़े थे.

सर ने अपने लौड़े की झांटों को साफ कर रखा था. इसलिए दोनों टट्टे मस्त चमक रहे थे.

तभी सर ने कहां- इधर आओ मेरी जान और जरा अपने सर के लॉलीपॉप को चूसो!

अब मैं उनसे क्या कहता कि आपकी यह लॉलीपॉप नहीं है बल्कि एक सांड का हथियार है.

मैं सहमते हुए थोड़ा आगे बढ़ा और जैसे ही सर के लौड़े के करीब हुआ, उन्होंने मेरे हाथ में अपना सांड लंड पकड़ा दिया.
मैं उसे हल्के हल्के सहलाने लगा.

तभी सर ने मुझे घुटनों के बल बैठा दिया और मेरे होंठों पर अपने लंड रगड़ने लगे.
ऐसा करते करते उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह में धकेल दिया और हल्के हल्के धक्के देने लगे.

उनका काला लंड मेरे गुलाबी होंठों में अटक सा गया था. मेरे गुलाबी होंठ उनके काले लंड को चूसने लगे.
सर का लंड इतना मोटा था कि बड़ी मुश्किल से आधा ही मेरे मुँह में आ रहा था. सर मस्ती से आंखें बंद किए लंड चुसवा रहे थे.

‘पुच … पुच … पुच … पुच …’ की मधुर आवाज कमरे में गूंजने लगी थी.
‘आह … आह … हां … हां … चूसो मेरी जान … अपने सर के लंड को अच्छे से चूसो … आह.’
लंड चूसते चूसते मैं सर के एक टट्टे को भी एक हाथ से सहलाने लगा और तभी मैंने उसको भोंपू की तरह दबा दिया!’

‘आईई … धीरे दबा भोसड़ी के ..’
सर की थोड़ी दर्द और मस्ती भरी आवाज आई.

‘हाय बदमाश … अपने सर को छेड़ता है!’ सर ने फिर से मस्ती में कहा.
फिर मैंने सर के टट्टे को भी चूसना शुरू कर दिया, जिससे सर और मस्ती में आ गए.

‘हाय … कितना प्यारा है तू …’
सर मेरे बालों पर हाथ फेरते हुए बोले.

मैं सर के लंड को मस्ती से चूसता रहा.
काफी देर के बाद हम उठे और सर मुझे किस करते हुए बेड पर ले गए.

सर ने मुझे बेड पर लिटाया और खुद बेड पर कूद कर आ गए.
मेरी दोनों टांगों को खींच कर वे मुझे अपनी तरफ खींच लाए और मेरी दोनों टांगों को मोड़ कर मेरी छाती से लगा दिया.

अब उन्होंने मेरी लुल्ली को अपने मुँह में भर लिया और उसका रसपान करने लगे.
‘उईईई … सर … अअ आह्ह्ह्ह …’ मेरी मदहोश कर देने वाली आवाज आने लगी.

फिर सर ने मेरी लुल्ली और गांड के छेद के बीच के छोटे से हिस्से की दरार को चाटने लगे.
उन्हें मेरा जिस्म बहुत प्यारा लग रहा था इसलिए वे हर हिस्से का मजा ले रहे थे.

‘कितनी प्यारी खुशबू है तुम्हारे जिस्म की … उम्म्म … उम्म्म्म.’
सर मजे से आंखें बंद किए बोले.

फिर उन्होंने मेरी लुल्ली को भी अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगे.
मैं मदहोशी में कामुक होने लगा.

‘आई … सर … उम्म्म … उफ्फ … उम्मम्म … उफ्फ …!’
थोडी देर बाद सर ने मेरे पूरे जिस्म को चाटा और उठ कर फ्रिज की तरफ गए. उधर से सर मक्खन की डब्बी उठा लाए.

उन्होंने ढेर सारा मक्खन मेरे गुलाबी चूचुकों में लगाया और एक को चाटने लगे.
‘हाय …’ एक सुखद अहसास पूरे जिस्म में दौड़ गया.

सर पूरे मंजे हुए खिलाड़ी थे.
अब उन्होंने ढेर सारा मक्खन अपने लंड पर लगाया और मेरी तरफ वासना से देखते हुए लंड को मसलने लगे.

उस ढेर सारे मक्खन को अपने लंड पर मसलने के बाद उन्होंने लौड़े को मेरे मुँह में डाल दिया.
सर के मक्खन लगे लंड को चूसने का अलग ही मजा आने लगा.

फिर सर ने मुझे डॉगी स्टाइल में कर दिया और अपने लंड पर तेल मलने लगे. सर ने मेरी गांड के गुलाबी छेद को फैला दिया और उसमें काफी सारा मक्खन अन्दर तक भर कर लिसोड़ दिया.
गांड का पूरा छेद मक्खन से चुपड़ने के बाद सर ने उसमें अपनी एक उंगली डाल दी और अन्दर बाहर करने लगे.

‘कितना ज्यादा टाइट छेद है तेरा … आज तो तेरी टाइट गांड पेलने में मजा आ जाएगा!’
Xxx टीचर पूरे सेक्सी अंदाज में बोले.

थोड़ी देर उंगली पेलने के बाद सर ने मेरे कमर को थामा और पीछे आ गए.
मैं समझ गया कि अब असली काम शुरू होने वाला है.

ये सोच कर मैं सिहर गया कि मेरी गांड का क्या होगा. इतना मोटा मुसंड लंड मेरी छोटी सी गांड में जाएगा कैसे?
मैंने थूक निगल कर सहमी आवाज में कहा- सर, आपका इतना मोटा है, ये मेरी गांड में फिट कैसे होगा?

सर ज़ोर से हंस पड़े और कहा- घबराओ मत मेरी जान, मैं तुम्हें बहुत आराम से चोदूंगा. मैं तेरी गांड बहुत प्यार से मारूंगा. मुझे तो तेरे इस छोटे छेद वाली गुलाबी गांड से प्यार हो गया है. मैं इसका पूरा ख्याल रखूंगा.

मैंने सर के कहने पर खुद को थोड़ा सा दिलासा दी और आने वाली बमबारी के लिए खुद को तैयार करने लगा.

मैंने आंखें बंद की और खुद को हालात के हवाले कर दिया.

सर ने अपना मोटा सुपाड़ा मेरी कोमल गांड के चिकने से छेद पर रख दिया.

तेल लगाने से सर का अजगर और चमकने लगा था. सर ने मेरी कमर को फिर से थामा और एक पल को रुक कर एक हल्का सा शॉट मारा.
‘पक.’ की आवाज के साथ सिर्फ सुपाड़ा घुसा और मेरे छेद में मुझे पूरा मूसल घुसता महसूस हुआ.

सर ने फिर से शॉट मारा.
मक्खन और तेल की मिली जुली चिकनाहट की वजह से पूरा सुपाड़ा मेरी गांड में अन्दर घुस कर फंस गया.

मेरे मुँह से निकला- आह. मर गया सर आह फट गई मेरी आह धीरे …
कितना ही चिकना सही, पर सर का लंड बहुत मोटा था और मेरा छेद बहुत छोटा सा था. इसलिए अन्दर जाने में दिक्कत तो हो ही रही थी.

‘हाय … क्या टाइट गांड है!’
सर मस्ती में आंखें बंद किए बोले और फिर से शॉट दे मारा.

‘ऊईईई …’
इस बार मैं अपनी कराह को नहीं रोक पाया क्यूंकि सर का मुसंड लंड मेरी गांड में आधा घुस गया था.

ये मोटा लंड मेरे छेद को पूरा चौंड़ा करते हुए अन्दर घुस गया था.
सर कस कस के मेरी गांड के मुलायम छेद को मानो कूट रहे थे.

‘सर … रहने दो और मत डालो … उफ उफ्फ … बहुत मोटा है आपका सर … मेरी गांड फट रही है.’

मैंने कराह के साथ कहा तो सर बोले- अभी तो शुरू हुआ है मेरी जान … अभी थोड़ा सा सह लो, फिर देखो, कितना मजा आएगा तुम्हें!

सर वैसे ही मेरी गांड में लंड ठांसे हुए बोले और उन्होंने हल्का सा धक्का दे दिया तो ऐसा लगा कि मेरी गांड आधी फट गई हो और बची खुची की मां चोदने पर सर अपने लौड़े को अन्दर बाहर कर रहे हैं.

‘आआह आआअह्ह्ह … आईईईआई … सर … उफ उफ … नहीं सर रहने दो बहुत मोटा है … बहुत लग रही है सर …’
मेरी पीठ पर सर का वजन आ गया था और मेरा सर बिस्तर पर गिर गया था. मैंने बांए हाथ से पीछे से सर के कूल्हों को रोक रखा था … ताकि वे और धक्के ना लगाएं.

सर ने कहा- अच्छा मेरी छमिया, अब मैं इतना ही करूंगा … तुम रिलैक्स करो!

फिर सर ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए.
‘पच … पचर … पच … पचर …’ की आवाज मेरी गांड की तरफ से आने लगी और सर का लंड बहुत ही अन्दर तक धंस धंस कर गांड के अन्दर बाहर होने लगा.

दोस्तो, सर ने मेरी गांड में अपना राक्षसी लौड़ा पेल तो दिया था और मेरी गांड को बजाने भी लगे थे.

लेकिन उनके लंड से अपनी गांड का कचूमर किस तरह से बना, उसे मैं अपनी गे सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूँगा.
Xxx टीचर स्टोरी पर आप प्लीज अपने मेल व कमेंट्स से अवगत करवाएं.
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आपका मोनी

Xxx टीचर स्टोरी का अगला भाग: अध्यापक ने विद्यार्थी की गांड फाड़ दी- 3

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