अध्यापक ने विद्यार्थी की गांड फाड़ दी- 1

(Master Sex Story)

मोनी पोली 2025-04-02 Comments

मास्टर सेक्स स्टोरी में मेरे एग्जाम में विजिलेटर ने मेरी मदद की पर बदले में मिठाई मांगी. मैं मिठाई लेकर उसके घर गया तो मुझे पता लगा कि उसकी मिठाई का मतलब मेरी गांड थी.

दोस्तो, मैं आपका मोनी एक बार फिर से अपनी नई पेशकश के साथ हाजिर हूं.

सबसे पहले तो मैं आप सभी का शुक्रगुजार हूं कि आपने मेरी पिछली सेक्स कहानी
बूढ़े अंकल ने मेरी कुंवारी गांड चोदकर खोली
कहानी प्रकाशित होने के कुछ ही घंटों में मुझे जो रिस्पॉन्स मिला, वह अकल्पनीय था.

कुछ ही घंटों में हजारों पाठकों के लाइक्स आ गए और इतने सारे मैसेज भी आ गए कि मैं हैरान रह गया.

अभी तक मैसेज आ रहे हैं और लोग मुझसे मिलने को बेताब हैं.
आप सबका अपार प्यार पाकर मेरा दिल खिल उठा और मुझे बहुत प्रोत्साहन मिला.

आप सभी का तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया और मेरी तरफ से ढेर सारा प्यार भी.

दोस्तो, हम सभी को इस साइट का आभारी होना चाहिए जो हमारी इस उलझनों भरी जिंदगी में कुछ रंगीनियां ला देती है.

हम सभी अपने अपने जिंदगी में बहुत ही उलझे हैं, मसरूफ हैं … ऐसे में हमारी ये प्यारी सी महफ़िल एक दूसरे के साथ प्यार भरे पल बिता लेती है, यही हमारी सफलता भी है और यही जिंदगी का असली मतलब है.

खुशी से रहो और खुशी बांटो
प्यार लो, प्यार दो.

अब इस मास्टर सेक्स स्टोरी का मजा लें.

मेरी परीक्षाओं की तारीख आ गई थी.
मुझे अपने एग्जाम्स की तैयारी करनी थी.

एग्जाम में मालूम हुआ कि पेपर बहुत टफ है. फिजिक्स का पेपर तो पल्ले ही नहीं पड़ रहा था.

हम सभी लड़के बहुत परेशान थे और सब एक दूसरे की तरफ देख रहे थे.

हमारे क्लास में जो इंविजिलेटर महोदय बैठे थे, वे चुपचाप पूरी क्लास पर नजर रखे हुए थे.

उनके बगल में टेबल के नीचे किताबों का ढेर था, जो हम छात्र साथ में लाए थे एग्जाम से पहले पढ़ने के लिए.

हम सब लाचारी से उस ढेर की तरफ देख रहे थे.

तभी सर हम सब की तरफ देखने लगे.
उनको भी समझ आ गया था कि हालत क्या है.

मैं भी औरों की तरह किताबों की तरफ लाचारी से देख रहा था.
तभी वह सर मेरी तरफ गौर से देखने लगे.

मेरी बड़ी बड़ी आंखों को देखने लगे और मेरे चेहरे को गौर से देखने लगे.

मेरी भी उनसे नजर मिली और मैंने मासूमियत से उनकी तरफ देखा.

उनको मेरी लाचारी दिखी.
फिर वे उठ कर मेरी तरफ आए और मेरे पेपर को देखने लगे.

एक सवाल अटका पड़ा था, उन्होंने इधर उधर देखा और धीरे से मुझे उस सवाल का जवाब बता दिया.
मुझे हैरत हुई लेकिन फिर मैंने जल्दी से उस जवाब को अपने आंसर्स शीट में उतार लिया.

मुझे बड़ी खुशी हुई कि सर ने मेरी मदद की.
एक दो जवाब देकर सर अपनी सीट पर जाकर बैठ गए.

थोड़ी देर बाद सर ने मुझे इशारा किया कि मैं वहां बगल में रखी हुई किताब उठा लूं.
मैं धीरे से उठा और किताब उठा कर अपनी सीट पर बैठ गया.

मेरे देखते ही और भी लड़के किताब उठा कर लिखने लगे और हमारे क्लास रूम का माहौल ही बदल गया.

मैं बहुत खुश हुआ और हम सभी बड़े आराम से पेपर लिखने लगे.
थोड़ी देर बाद सर उठ कर मेरी तरफ आए और पूछा- कैसा चल रहा है, अब तो कोई परेशानी नहीं है न!

मैंने कहा- सर थैंक्यू सो मच … आप कितने अच्छे हो!
वह मुस्कराने लगे और कहा- मिठाई पक्की है, है न?

मैंने कहा- क्यों नहीं सर, बिल्कुल पक्की है. आप जो कहेंगे, वे होगा!
वे फिर से बोले- मिठाई पक्की है न?

वे मेरी तरफ रहस्यमयी नजरों से देखने लगे.
फिर वे सीट पर जाकर बैठ गए और उधर से ही मेरी तरफ देखने लगे.

उनकी नजरें मेरी गोरी जांघों में फिसल रही थीं.
मैंने स्कूल यूनिफार्म का हाफ पैंट पहन रखा था.

एग्जाम बहुत अच्छे से खत्म हुआ और मैं खुशी खुशी मुस्कुराता हुआ एग्जाम हॉल से बाहर निकला.

वहां पर सर खड़े मिल गए.
वे हल्का लंगड़ा कर चलते थे क्योंकि उनका एक पैर खराब था.

वे गहरे सांवले या कहूँ कि जामुन से काले रंग के थे.
काफी मोटी काया के स्वामी थे और सर पर बाल नहीं थे.

मैं मुस्कुराता हुआ उनकी तरफ गया और उनको फिर से शुक्रिया कहते हुए उनसे मिठाई का वादा किया.

उन्होंने मेरी मदद की थी, मैं उनकी कोई भी बात मानने को तैयार था.

सर मुस्कुराकर बोले- मेरी मिठाई तो आपको मेरे कमरे में आकर देनी होगी!
मैं बोला- हां ठीक है सर, आप जहां कहेंगे … मैं ले आऊंगा!

सर ने मुस्कुराते हुए मुझे अपने क्वाटर का पता दिया.
मैं उनसे पता लेकर घर आ गया.

इसके दो दिन के बाद मैंने बाजार से एक अच्छी सी मिठाई ली और सर के घर पहुंच गया.

उनको स्कूल कंपाउंड में ही एक क्वाटर दिया गया था.
इस पूरे कंपाउंड में कोई और घर नहीं था.
वह इस कंपाउंड में अकेले रहते थे.

मैं कंपाउंड का मेन गेट खोल कर चलता हुआ उनके घर के गेट पर पहुंचा.

बेल बजाने पर उन्होंने गेट खोला और मुझे देखते ही उनकी आंखों में चमक आ गई.
उन्होंने खुशी से मुझे घर के अन्दर लिया और बैठाया.

‘अहा तुम आ गए … मुझे बड़ी खुशी हुई!’
वे खुश होते हुए बोले.

‘कैसे नहीं आता सर, आप इतने अच्छे हो, अपने मेरी इतनी मदद की है !’

मैंने यह कहा तो उन्होंने मुझे बैठने का इशारा किया और अन्दर चले गए.

वे मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक लेकर आए.
उन्होंने सिर्फ एक गंजी और गमछा लपेट रखा था.
उनकी मोटी मोटी जांघें आधी खुली थीं.

शायद सर घर पर अकेले थे इसलिए ऐसे कपड़े पहन कर रह रहे थे.

मैंने उन्हें मिठाई का पैकेट पकड़ाया और कहा- ये लीजिए सर, आपकी मिठाई!
उन्होंने मेरी तरफ अजीब सी नज़रों से देखा.
वे कुछ देर यूं ही मुझे देखते रहे.

उनकी नजरों का तीखापन मुझे थोड़ा अजीब सा लगा.
मैंने देखा कि वे मुझे एकटक निहार रहे थे.

उस दिन मैंने ब्लैक पैंट और नेवी ब्लू टी-शर्ट पहन रखी थी.

वे मेरे पूरे बदन को गौर से निहार रहे थे.
इससे मुझे थोड़ी कसमसाहट सी होने लगी.

फिर वे धीमी मुस्कुराहट के साथ कहने लगे- तुम इस मिठाई को लाए हो, मैं तो कोई और मिठाई की बात कर रहा था!

मुझे उनकी बात अजीब सी लगी.
मैंने कहा- मैं कुछ समझा नहीं सर?

उन्होंने मुझे इशारे से अपने पास बुलाया. मैं उनके पास गया तो उन्होंने मेरे दोनों गालों को अपने उंगलियों में भरा और बोले- मैं तो इस गोल मिठाई की बात कर रहा था!

मेरी सांस तो जैसे ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे अटक गई.
मैंने ख्वाब में भी नहीं सोचा था कि उनका ये मतलब होगा!

वे मेरे चक्कर में थे और मुझे पाना चाहते थे.
‘सर, ये आप क्या बोल रहे हो?’

मैंने अटकते हुए कहा, तो उनका जबाव आया- हां मेरी जान, मैं तो तुम्हें चखना चाहता था, तुम्हारे गुलाबी होंठों का रस पीना चाहता हूँ.
सर के मुँह से ऐसी बातें सुनकर मैं हैरान रह गया और मुझे अपने अन्दर अजीब सी सिहरन होने लगी.

वे मेरे सर थे हालांकि वे हमारे स्कूल में नहीं पढ़ाते थे, फिर भी थे तो टीचर ही!
‘सर, मैं नहीं समझ पा रहा हूँ कि आप क्या कह रहे हैं. मैं तो आपकी खुशी के लिए मिठाई लाया हूँ, जो कि आप चाहते थे. आपने मेरी मदद की इसलिए आपका शुक्रगुजार हूँ .

सर ने कहा- मेरी खुशी तो तुम हो मेरी जान!
सर पूरे जोश और रोमांस भरे लहजे में बोले.
उनकी आंखों में नशा भरा हुआ था जो इस बात का गवाह था कि वे मेरे लिए कितना मदहोश हैं.

मैं कशमकश में पड़ गया कि क्या करूं अब!
ये तो बड़ी अजीब बात हो गई थी.

तभी वह मेरे सामने खड़े हो गए और बोले- देखो मैंने तुम्हारी मदद की न, अब तुम्हारा भी तो फर्ज है न कि तुम अपने वादे के मुताबिक मेरी बात मानो और मुझे मेरा तोहफा दो!
यह कह कर वे मेरी गोरी नंगी बांहें सहलाने लगे.

उनकी बात सही थी, उन्होंने मेरी मदद की थी और मैंने उनके तोहफे का वादा भी किया था.
लेकिन वह तोहफा मैं खुद होऊंगा, यह मैंने सपने में भी नहीं सोचा था.

तभी सर ने मेरे कान में अपने होंठ सटा दिए और हल्के से फुसफुसा कर बोले- देख लो बेटा, अभी फाइनल एग्जाम के प्रैक्टिकल भी होने हैं. उसमें भी मैं ही होऊंगा. उसमें भी मेरी ही ड्यूटी लगेगी! देख लो तुम्हारे लिए ये अच्छा ही रहेगा.

वे साफ तौर पर एक तरह से मुझे ऑफर दे रहे थे.
ये सही भी था और मुझे अपना वादा भी तो निभाना था.

मैं सोच में पड़ा हुआ था.
इस बीच सर मेरी बांहों और मेरे गालों पर हाथ से फेरने लगे.

वह मेरे पूरे बदन पर हाथ फेर रहे थे.
उनके इस तरह हाथ फेरने से मेरे अन्दर अजीब सी हालत होने लगी.

चाचा की किताब की दुकान पर हुई उस सुहानी घटना के बाद मेरे जिस्म में अजीब सी फीलिंग आने लगी थी.

तभी सर मेरे बदन में हाथ फेरते फेरते उठे और दरवाजे की तरफ चले गए.
उन्होंने झपटते हुए दरवाजा बंद कर दिया.

अब तो पक्का हो गया था कि सर मुझे पाकर ही रहेंगे और मेरी कमसिन खिलती जवानी का रस पीकर ही रहेंगे.

फिर वे मेरे पास आए और मेरे जिस्म पर हाथ फेरने लगे.

मैं मूर्ति बना चुपचाप खड़ा था क्योंकि मुझे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या करूं.

मेरी खमोशी को उन्होंने मेरी रजामंदी समझा और खुल कर अपना काम करने लगे.
अब उन्होंने मुझे अपने सीने से लिपटा लिया और मुझे भींच कर मेरे मुँह को अपनी तरफ खींचने लगे.

मैं कुछ समझ पाता कि तभी उन्होंने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
हाय … मेरी तो हालत ही खराब हो गई. पूरे बदन में मदहोशी भर गई.

अगर आम तौर पर देखा जाए तो सर को कोई यूं शायद पसंद नहीं करता, उनकी भद्दी सी बॉडी और काले रंग की वजह से, लेकिन ऐसे हालात में तो किसी का भी फंस जाना सामान्य सी बात है.

बस मैंने अपनी आंखों को बंद कर लिया तो सर का स्पर्श अच्छा लगने लगा और मेरा बदन अपने आप पिघलने लगा था.
सर ने अपने मोटे होंठों से मेरे गुलाबी होंठों को चूसना शुरू कर दिया. मेरी आंखें मस्ती का अनुभव करने लगीं.

तभी सर ने मेरे होंठ चूसते हुए मेरे बदन में हाथ फेरना शुरू कर दिया.
मैं होंठों का मजा ले ही रहा था कि तभी उन्होंने मेरी गांड में हाथ रख दिया और उसे भींच दिया.

उनकी हरकतों से मुझे कुछ कुछ होने लगा और मुझे अहसास हुआ कि अब सर मेरी गांड मारे बगैर नहीं मानेंगे.

सच तो ये था कि मुझे भी कुछ कुछ मजा आने लगा था इसलिए मैंने खुद को सर के हवाले कर दिया.

‘ऊंह सर … जाने दो ना … ये आप क्या कर रहे हो!’
मैंने यूं ही इठला कर कहा.

मेरी कसमसाहट ने सर को और जोश दे दिया.
सर ने मुझे चूमते हुए मदहोश लहजे में कहा- वही कर रहा हूँ जान, जो मुझे करना चाहिए. मैं तो अपना इनाम वसूल कर रहा हूँ!

फिर वे यहां-वहां हाथ फेरने लगे. मुझे चूमने लगे. मैं गहरी सांसें लेता हुआ खोने लगा और सर मुझे कस कर भींचते गए.
चुम्मा चाटी करने के बाद सर ने मुझसे कहा- अपनी टी-शर्ट उतारो!

मैंने कहा- सर मुझे शर्म आ रही है … रहने दो न!
‘अरे ऐसे कैसे रहने दूं!’

इतना कहकर सर ने अपने हाथों से मेरी टी-शर्ट को उतार दिया … और मेरी बनियान के ऊपर से मेरी एक चूची को मसलने लगे.

फिर उन्होंने मेरी बनियान को भी उतार फेंका और अपने होंठ मेरे गुलाबी निपल्स पर रख दिए. वे मेरे सीने के उभारों और घुंडियों को चूसने लगे.

उनकी इस मादक क्रिया से मेरे होंठों से सीत्कार फट पड़ी.
सर बड़ी मस्ती से मेरे निपल्स को चूस रहे थे और साथ ही मेरी गांड को कस कस कर भींच भी रहे थे.

थोड़ी देर बाद सर ने अपनी बनियान भी उतार फैंकी और ऊपर से उनकी मोटी तोंद वाली बॉडी नंगी हो गई.

उन्होंने मुझे खुद से लिपटा लिया और मेरे गोरे गोरे कमसिन जिस्म को अपने काले मोटे बोरे के जैसे जिस्म से रगड़ने लगे.

टीचर स्टूडेंट के मध्य गांड चुदाई की इस गे सेक्स कहानी में आपको कितना मजा आ रहा है, मास्टर सेक्स स्टोरी पर प्लीज अपने कमेंट्स जरूर बताएं.
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