कुंवारी लड़की की पहली चुदाई की लालसा- 3

(My Second Sex In Hotel Room)

मेरा सेकंड सेक्स होटल रूम में हुआ अपने उसी दोस्त के साथ जिसने मुझे पहली बार चोदा था. मैं कमरे में सगाई के लिए तैयार हो रही थी कि मेरा दोस्त मेरे कमरे में घुस आया.

कहानी के दूसरे भाग
दोस्त के लंड से चूत की सील तुड़वाई
में आपने पढ़ा कि कैसे मैंने अपनी सगाई के बाद अपने एक खास दोस्त के साथ होटल में अपने जीवन के पहले सेक्स का मजा लिया.

अब आगे मेरा सेकंड सेक्स:

आज मेरी हवस को उसका इलाज़ मिल गया था।
मैं बहुत खुश थी.

घर पहुंची तो घर वाले भी काफी खुश लग रहे थे।

मैंने पूछा- क्या हो रहा है? सब बड़े खुश लग रहे हैं?

मम्मी ने बताया- हम सबने रिंग सेरिमनी की डेट फ़ाइनल कर ली है 2 हफ्ते बाद की!
मैं बहुत खुश हो गयी।

फिर मम्मी ने कहा- कुछ दिन कॉलेज की छुट्टी कर लेना अगले हफ्ते! हम लोग थोड़ी ख़रीदारी कर लेंगे. तेरे पापा और चाचा मिलकर कोई अच्छा सा होटल बुक कर लेंगे।

मैंने राकेश से फोन पे बात करी और हम दोनों ही बहुत खुश थे।

तभी मैंने जय को भी यह बात बताई और वह भी बहुत खुश हुआ।

आगे कुछ दिन काफी व्यस्त रहे इसी सब की तैयारी में!
और आखिरकार सगाई का दिन भी आ गया।

मैंने सगाई के लिए बहुत खूबसूरत लहंगा चुन्नी खरीदा था जिसमे मैं किसी परी से कम नहीं लग रही थी।

सब लोग समारोह स्थल पर पहुँच गए थे और मैं ब्यूटी पार्लर से सीधी वहीं जाने वाली थी.
मेरी 2 चचेरी बहनें मुझे यहाँ से होटल ले जाने वाली थी जहां समारोह था।

मैं अच्छे से तैयार हुई और गाड़ी में बैठ गयी।

जब हम होटल पहुंचे तो मैं चौंक गयी.
क्योंकि यह वही होटल था जिसमे मैं 2 सप्ताह पहले आकर जय से चुदी थी।

मैं अंदर गयी तो सामने वही रिसैप्शनिस्ट थी.
वह मुझे देख के मुस्कुराने लगी और बधाई दी।

वैसे मुझे पता था कि ये किसी को बोलेगी तो नहीं … पर थोड़ा सा घबराहट हो रही थी.
इसलिए मैंने उससे धीरे से कहा- किसी से कुछ ना बोलना।
उसने बोला- आप चिंता मत करिए मैडम … मैं सब संभाल लूँगी।

सारे मेहमान लोग हाल में थे और मैं होटल के एक कमरे में चली गयी अपनी कुछ सहेलियों के साथ।

तभी मुझे जय का फोन आया तो मैं चौंक गई.
मैंने उठाया तो उसने कहा- क्या बात है … वापस उसी होटल में आ गयी. उस दिन खुद आयी थी आज तेरे सारे रिश्तेदार तुझे चुदवाने ले आए यहाँ!

तब मैंने साइड में जाकर बात की- क्या?! पागल है क्या? सगाई है मेरी यार … डर लग रहा है. किसी को पता तो नहीं चलेगा ना?
जय ने कहा- नहीं चलेगा यार … मैंने उस रिसैप्शनिस्ट को पटा लिया है, वह अपनी साइड है।

तब मेरी जान में जान आई।

तभी जय बोला- क्या बोलती है सुहानी … एक बार और हो जाए?
मैंने कहा- दिमाग खराब है तेरा? मेरी सगाई है आज … सब रिश्तेदार यहीं है, ऐसे में कैसे चोदेगा तू?
उसने कहा- अरे चिंता मत कर … अभी सगाई में 2 घंटे का टाइम है। राकेश को टाइम लगेगा. मैंने सुना है वे लोग काफी लेट हैं। बस अब तू अगर अपनी सहेलियों को वहाँ से सरका दे तो एक मौका तो निकल ही सकता है।

मेरे मन में भी लालच सा आने लगा पर डर भी लग रहा था।
पर किस्मत मेरे साथ थी और दोनों सहेलिया किसी काम से वहाँ से जाने लगी।

जैसे ही वे गयी, मैंने गेट बंद कर लिया.
पर तुरंत ही किसी के खटखटाने की आवाज आई।

मुझे लगा वही दोनों वापस आयी होंगी कोई सामान लेने!

पर गेट खोलते ही जय अंदर आ गया और कुंडी लगा ली।

मैं बोली- पागल है क्या? जा यहाँ से जा, कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा।
वह बोला- कोई नहीं देखेगा, सब नीचे बिजी है वैसे भी मैंने रिसैप्शनिस्ट को बोल दिया है कि ख्याल रखे और कोई गड़बड़ हो तो तुरंत फोन पे बता दे।

मैंने कहा- नहीं यार समझा कर, बाद में कर लियो! अभी तो शादी में टाइम है काफी!
उसने कहा- कुछ नहीं होगा, आज इतनी सुंदर लग रही है तू … कि लंड खड़ा हुआ जा रहा है बार बार तुझे देख के!

मैंने भी कहा- नहीं यार, मेकअप, कपड़े सब खराब हो जाएगा।

उसने कहा- देख अगर तू साथ देगी तो कुछ नहीं होगा खराब, बस 20 मिनट की बात है. एक काम कर … मैं कोई ज़ोर जबर्दस्ती नहीं कर रहा, तू खुद ही नंगी हो जा! साथ दे … मजा ना आए तो कहना!
मैंने कहा- तू मानेगा नहीं ना, रुक एक मिनट!

और मैंने मम्मी को फोन मिला के नीचे का हालचाल पूछा.
मम्मी ने बोला- अभी टाइम लगेगा काफी, तू आराम से बैठ … हम सब हैं यहाँ … देख रहे हैं।

तब मैं भी निश्चिंत हो गयी कि अब कोई नहीं आ रहा हमें डिस्टर्ब करने।

मैंने भी बोला- चल ठीक है!
और मुस्कुरा के जय को आँख मार दी।

बस फिर क्या क्या था … उसने तुरंत मुझे कंधों से पकड़ा और मेरे होंठों को अपने होंठों से मिला के चूमने लगा.

मैं भी फुल मजे लेने लगी और हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चुपड़-चुपड़ के किस कर रहे थे।

जय मेरे बूब्स को ऊपर से ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा।

मैंने कहा- ओये … ड्रेस खराब मत कर, रुक … मैं पूरी ही नंगी हो जाती हूँ और तू भी हो जा!

इसके बाद हम दोनों फटाफट नंगे हो आए और एक दूसरे पे जानवरों की तरह टूट पड़े.
वह मेरी गर्दन को किस करने लगा और मैं उस पल का मजा लेने लगी.

जय धीरे धीरे मेरे बूब्स मसल रहा था और मैं स्सी … स्सी … करते हुए मजे ले रही थी।
जब कुछ देर तक चुम्मा-चाटी से मन भर गया तो उसने मुझे बेड पे गिरा दिया और मेरी चूत पे टूट पड़ा और जीभ से कुत्तों की तरह चाटने लगा.

मुझे बहुत मजा आ रहा था।
मैं उचक उचक के स्सी … स्सी … आहह … अहह … करते हुए मजे ले रही थी, मेरी चूत जोश में गीली हुई जा रही थी।

मैंने अपनी टांगें मोड़ के उसकी गर्दन को चूत पे जकड़ रखा था और वह चाट चाट कर मुझे मजे दे रहा था।

मैंने उसको बालों को कस के पकड़ रखा था और वह चाटे जा रहा था।

अब बहुत ज़ोर से चुदाई की आग लगी थी तो मैंने कहा- अब रुक जा साले, चोद दे मुझे … बहुत हुआ चाटना!
उसने कहा- अभी ले, पर पहले मेरा लोड़ा तो चूस जानेमन!

मेरे लेटे हुए ही वह मेरे मुंह के पास आ गया, उसने बिल्कुल मेरे मुंह पे आकर अपना लंड ऊपर से नीचे घुसा दिया.
वह आगे गद्दे पे हाथ रख के झुक गया और मेरे मुंह में चोदते हुए सी ही लंड चुसाने लगा।

उसने करीब 2 मिनट तक इसी पोजीशन में अपना लंड चुसाया.
और जब लंड पूरा तन गया तो निकाल लिया।

अब हम दोनों चुदाई के लिए पूरे तैयार थे.

वह मेरे ऊपर आया और चूत से लंड सटा के एक बार में पूरा घुसाता चला गया।
मेरे मुंह से हल्की सी दर्द और मजे से भरी ‘आहह …’ की सिसकारी निकली।

कसम से गर्म चूत में गर्म सख्त लंड जा के जो शांति मिलती है उसे शब्दों में बयान करना बड़ा मुश्किल है।

लंड डाल के वह मेरे ऊपर लेट गया अपनी गान्ड उठा उठा के मेरी चूत में लंड डाले डाले ‘पट्ट … पट्ट …’ धक्के मारने लगा।
कमरे में पट्ट … पट्ट … की आवाज आने लगी।

अब मैं बेड के नर्म गद्दे और उपर जय के बीच में जबर्दस्त चुदाई करवा रही थी।

उसके वजन से दबे होने के बावजूद मुझे बहुत मजा आ रहा था।
मैं और वह चुदते हुए सेक्सी सिसकारी ले रहे थे।

फिर जब उसकी सांस फूल गयी तो वह लंड निकाल के साइड में लेट गया और हम दोनों हाम्फने लगे मुसकुराते हुए!
चोदने चुदवाने की खुशी थी भाई!

उसने लेटे लेटे ही कहा- मजा आ रहा है ना?
मैंने करवट लेते हुए कहा- हाँ बहुत!
और उसके होंठों को ज़ोर से चूम लिया।

फिर मैंने कहा- आगे चालू करें?
उसने कहा- बिल्कुल, चल पेट के बल लेट जा!
और मैं मुंधी (उल्टी) होकर लेट गयी और शीशे की तरफ चेहरा कर लिया ताकि उसे देख सकूँ।

वह पीछे झुके हुए आया और अपनी टाँगों के बीच मेरी टांगें ले के चूतड़ों पे अपना लंड रगड़ दिया।

फिर उसने ऐसे ही लेटे-लेटे मेरी चूत में अपना लंड सरका दिया औए मेरी कमर पे लेट के आगे पीछे अपना लंड मेरी चूत में चलाते हुए घप्प घप्प चुदाई करने लगा।

मैं और वह एक दूसरे को शीशे में देखे रह थे और चुदाई चालू थी।

उसने कहा- कभी सोच नहीं था कि तू चोदने को मिलेगी. मैं तो शरीफ समझता था तुझे!
मैंने कहा- साले, शरीफ लड़कियों की भी चूत में लंड की जरूरत होती है। ज्ञान मत चोद, बस मुझे चोद!

उसने कहा- वाह रे मेरी शरीफ दोस्त, इतनी शराफत कि मेरे नीचे नंगी होकर चुदवा रही है! सही है शराफत का तो जमाना ही नहीं है।

अब मैं शरमा गयी और मेरे चेहरे पे मुस्कुराहट आ गयी, इसलिए नीचे गद्दे में मुंह घुसा दिया.
पर चुदाई चालू रही।

ऐसे ही हम दोनों चुदाई करते रहे और स्सी … सी … आह … आह … की आवाज निकालते रहे।

तभी मेरे मोबाइल पर निशी यानि रिसैप्शनिस्ट का कॉल आया, उसने बोला- मैडम, आपकी मम्मी कमरे में आ रही हैं कुछ समान लेने. उनके पास कमरे की एक्सट्रा चाबी है। थोड़ा ध्यान रखना।

मैंने कहा- ठीक है, थैंक यू डियर!
और मैंने तुरंत जय को बोला- रुक-रुक साले … मम्मी आ रही है, छुपना पड़ेगा।

गलियारे में मम्मी की सैंडल की आवाज आयी तो मैंने कपड़े उठाए और हम दोनों बाथरूम में घुस गए।

मम्मी ने कमरे में घुस के आवाज लगाई- सुहानी कहाँ है तू?
मैंने अंदर से ही कहा- मम्मी थोड़ा तैयार हो रही हूँ, कुछ काम है क्या?
उन्होने कहा- कुछ नहीं, बस कुछ समान लेने आयी थी, वही ढूंढ रही हूँ बैग में … तू तैयार हो ले … कोई नहीं!

और मम्मी अंदर कमरे में सामान ढूंढने लगी।

इतने में पता नहीं जय को क्या शरारत सूझी … उसने मुझे दीवार से सटा के मेरी चूत में लंड पेल दिया।
मेरे मुंह से ‘स्सी …’ निकल गयी पर बाहर तक नहीं गयी होगी।

मैंने फुसफुसाते हुए कहा- पागल हो क्या? अंदर मम्मी हैं … निकाल साले!
उसने कहा- ऐसे ही तो मजा आयेगा जानेमन!

और वह मेरे मुंह को अपने हाथ से दबा के आगे-पीछे दबा के चोदने लगा धीरे धीरे!

मुझे ऐसे और भी मजा आने लगा।

इधर मम्मी रिश्तेदारों की बात बताते हुए अपना कुछ सामान ढूंढ रही थी और कुछ फीट दूर उसकी बेटी अपनी चुदाई करवा रही किसी और से!

3-4 मिनट हम ऐसे ही धीरे धीरे वाली आनंदमयी चुदाई करते रहे और मैं हल्के हल्के स्सी … स्सीस्सी … करती रही।

फिर हमने पोजीशन बदल ली और धीर धीरे जय ने पीछे की तरफ से लंड डाल के मेरी चुदाई जारी रखी।

फिर मम्मी ने कहा- मिल गया!
और कहा- सुहानी देख ये वाला हार सही रहेगा ना सगाई में पहनने को।
मैंने कहा- मम्मी मैं बाथरूम से कैसे देख सकती हूँ।

मम्मी ने कहा- अरे … एक बार दरवाजा खोल के झांक के तो देख!
मैंने कहा- मम्मी सही ही लग रहा होगा!

मम्मी बोली- अरे, तू दरवाज़ा खोल के झांक के तो देख एक बार!

मैंने जय से फुसफुसा के कहा- एक मिनट!
और मैंने धीरे धीरे दरवाजा खोला और बाहर झांक के मम्मी को देखा.

और इधर उसका लंड मेरे अंदर धीरे धीरे चोद रहा था।

मम्मी ने कहा- अच्छी लग रही हूँ ना मैं?
मैंने कहा- हाँ मम्मी बहुत!

हालांकि मैं जय के धक्कों से हल्की हल्की आगे पीछे हो रही थी पर मम्मी को शक नहीं हुआ।

इसके बाद मैंने दरवाजा बंद कर लिया।

मेरी सेकंड सेक्स कहानी पर आपके विचार आमंत्रित हैं.
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मेरी सेकंड सेक्स कहानी का अगला भाग: कुंवारी लड़की की पहली चुदाई की लालसा- 4

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